भारत में गोल्ड लोन की मांग ने सभी को चौंका दिया है। यह ऐसा तूफान बनकर उभरा है, जिसने पर्सनल, होम और कार लोन को पीछे छोड़ दिया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 तक गोल्ड लोन में 87.4% की शानदार बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान बैंकों द्वारा दिए गए गोल्ड लोन का कुल मूल्य 1.91 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले साल, यानी 23 फरवरी 2024 तक यह आंकड़ा महज 1.02 लाख करोड़ रुपये था। 2024 में गोल्ड लोन की सालाना वृद्धि दर 15.2% थी, लेकिन अब यह उछाल इसे लोन की दुनिया का नया सिरमौर बना रहा है।
हाइलाइट्स
- गोल्ड लोन की मांग में 87.4% की वृद्धि।
- फरवरी 2025 तक गोल्ड लोन का आंकड़ा 1.91 लाख करोड़ रुपये।
- पर्सनल, होम और कार लोन की वृद्धि दर में भारी गिरावट।
गोल्ड लोन की तेज रफ्तार
RBI ने 41 बैंकों से डेटा जुटाकर यह रिपोर्ट तैयार की है। सितंबर 2024 से गोल्ड लोन में 50% की तेजी देखी गई है, जो कुल ऋण वृद्धि की तुलना में कहीं ज्यादा है। ये आंकड़े बताते हैं कि लोग तुरंत नकदी की जरूरत के लिए सोने को गिरवी रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सोने की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भी लोगों को ज्यादा कर्ज लेने में मदद की है। इसके अलावा, बैंकों द्वारा असुरक्षित लोन (unsecured loans) पर सख्ती बरतने से भी गोल्ड लोन की मांग बढ़ी है। कम कागजी कार्रवाई, तेज प्रोसेसिंग और सुरक्षित लेनदेन ने इसे और आकर्षक बना दिया है।
अन्य लोन का बुरा हाल
दूसरी ओर, अन्य लोन की स्थिति चिंताजनक है। फरवरी 2024 में पर्सनल लोन की वृद्धि दर 21.7% थी, जो फरवरी 2025 में घटकर 7.9% रह गई। होम लोन की ग्रोथ 36.4% से गिरकर 11.1% पर आ गई। एजुकेशन लोन की वृद्धि दर 23.9% से घटकर 15.3% और कार लोन की ग्रोथ 17.6% से गिरकर 9.6% पर सिमट गई। यह साफ है कि जहां गोल्ड लोन आसमान छू रहा है, वहीं बाकी लोन जमीन पर आ गए हैं।
क्यों बढ़ रही है गोल्ड लोन की डिमांड?
भारत में सोने का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व किसी से छिपा नहीं है। शादियों, त्योहारों और निवेश के लिए सोना खरीदना यहां आम बात है। भारतीय घरों में करीब 25,000 टन सोना मौजूद है, जिसकी कीमत आज 126 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। ऊंची कीमतों की वजह से लोग इसे गिरवी रखकर ज्यादा रकम हासिल कर पा रहे हैं। साथ ही, आर्थिक अनिश्चितता और नौकरियों में कमी के चलते लोग गोल्ड लोन को तुरंत कैश जुटाने का सबसे भरोसेमंद तरीका मान रहे हैं।
क्या यह ट्रेंड बना रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई और ब्याज दरों में बड़े बदलाव नहीं हुए, तो गोल्ड लोन की मांग आगे भी जारी रह सकती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है और यहां सोने की उपलब्धता इसे लोन का एक मजबूत आधार बनाती है। बैंकों और NBFC ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इसकी पहुंच आसान कर दी है। लोग इसे न सिर्फ आपात स्थिति में, बल्कि छोटे कारोबार और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
गोल्ड लोन की खासियत
- कम ब्याज दरें: सोना collateral होने से ब्याज दरें अन्य लोन की तुलना में कम रहती हैं।
- तेज प्रक्रिया: कुछ ही घंटों में लोन मिल जाता है।
- लचीलापन: इसका इस्तेमाल किसी भी जरूरत के लिए किया जा सकता है, जैसे कि होम या कार लोन की तरह बंधन नहीं।
निष्कर्ष
लोन की दुनिया में गोल्ड का दबदबा साफ नजर आ रहा है। जहां पर्सनल, होम और कार लोन की चमक फीकी पड़ रही है, वहीं गोल्ड लोन एक चमकते सितारे की तरह उभरा है। यह न सिर्फ लोगों की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि बैंकों के लिए भी एक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन गया है। आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज की बदलती तस्वीर को दर्शाता है।